Sunday, 17 January 2016

1-715 झूंट ही कह दिया था किसी ने

झूंठ ही कह दिया था किसी ने, ज़िन्दगी एक ख्वाब है,
सभी ख्वाब आये हमें, बस एक यही ख्वाब नहीं आया..(वीरेंद्र)/1-715

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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