Sunday, 17 January 2016

1-711 टूट चुकी है दोस्ती

टूट चुकी है दोस्ती तो आओ कुछ रस्म भी निभा दें,
खो जाएँ भीड़ में, एकदूजे को फिर से अजनबी बना दें...(वीरेंद्र)/1-711

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment