Sunday, 31 January 2016

0-537 तमन्नाओं पर जब पानी

तमन्नाओं पर पानी जब फिर जाता है,
सैलाब में उसके इंसान जब गिर जाता है,
अरमानों की लाश की तलाश होती नहीं,,
गुमनामी के अंधेरों में वो घिर जाता है।(वीरेंद्र)/0537


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी".

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