Saturday, 30 January 2016

0-536 रिश्ते हवा में तामीर

रिश्ते हवा में तामीर नहीं होते ये याद रखें,
इनको बनाने से पहले इनकी बुनियाद रखें,
रिश्ते बैठ जाते हैं जब दीवारें खड़ी होती हैं,
दिलों की हवेली में एतमाद को आबाद रखें..(वीरेंद्र)/0536

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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