Thursday, 28 January 2016

0-535 आइना किस्तों में रोज़

आइना किस्तों में रोज़ हकीकत बताता है,
हर रोज़ हमें बदलती हुई सूरत दिखाता है,
भांप न पाते हम उसके किसी इशारे को,
समझ में आता है तभी जब वक्त आता है।.(वीरेंद्र)/0-535


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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