Thursday, 28 January 2016

0-534 दूर ही जाना है तो पास

दूर ही जाना है तो पास आना ज़रूरी तो नहीं,
बिछड़ ही जाना है  तो लड़ना ज़रूरी तो नहीं,
कतै-ताल्लुक करना हो तो यूँ भी हो जाता है,
चंद तोहमतें आपस में लगाना ज़रूरी तो नहीं..(वीरेंद्र)/0-534


रचना; वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"...

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