Friday, 25 December 2015

2-336 मोती दमक उठें जब

मोती दमक उठें जब होठ खुलें,
बादल घिर आएं जब गेसू खुलें,
नीला आकाश भी फींका दिखे,
जब वो पहनके नीला रंग चले..(वीरेंद्र)/2-336

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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