Friday, 25 December 2015

2-330 बड़े मज़े में हो आप

बड़े मज़े में हो आप मेरा दिल तोड़ कर,
काश दिल तोडना मेरा भी शगल होता..(वीरेंद्र)/2-330

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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