Friday, 25 December 2015

1-707 तेरे बिन, तन्हाई तो झेल

तेरे बिन, तनहाई तो झेल भी लूं मै,
तेरी ख़ामोशी का कहर सहा जाता नहीं..(वीरेंद्र)/1-707

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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