Wednesday, 9 December 2015

1-705 कोई नहीं पुरसाँ-हाल ऐ

कोई नहीं पुरसाँ-हाल ऐ दिल तेरा, तू भी तड़पना छोड़ दे,
बदल चुकी दुनियां अब, तू भी किसी के लिए धड़कना छोड़ दे..(वीरेंद्र)/1-705

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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