Monday, 30 November 2015

0-522 दिल पर बोझ बहुत हैं

दिल पर बोझ बहुत हैं मेरे,
दर्द-बयानी करके हल्का कर लेता हूँ,
गम ताकतवर बहुत हैं मेरे,
ये सोच ग़मों से समझौता कर लेता हूँ..(वीरेंद्र)/0522

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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