Tuesday, 28 July 2015

2-313 कुछ नसीहतें अपने लिए

कुछ नसीहतें अपने लिए भी तो संभाल कर रख ले "वीरेंद्र"
निहायत ज़रूरी हैं ये तेरे वास्ते भी, इन्हें यूं न लुटाया कर लोगों में..(वीरेंद्र)/2-312 

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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