Wednesday, 15 July 2015

2-308 यूं तो कमियाँ हर इंसान

यूं तो कमियां हर इंसान में बहुत सारी होती हैं,
मगर कुछ कमियां बाकी सब पर भारी होती हैं,
बस एक हम ही हैं मुकम्मल दौर-ऐ-ज़िन्दगी में,
यूं सोच लेना भी गलतफहमियां हमारी होती हैं..(वीरेंद्र)/2-308

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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