Friday, 17 July 2015

1-676 मेरी ग़ज़ल मेरे शेर

मेरी ग़ज़ल मेरे शेर दुनिया ने पढ़े,
लिक्खे थे मैंने जिसके लिए बस उसी ने न पढ़े .(वीरेंद्र)/1-676

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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