Tuesday, 28 July 2015

1-669 खोटी थी हमारी किस्मत

खोटी थी हमारी किस्मत, फिर भी उसे हम आजमाते रहे,
बेवफा हो गया था वो मगर आजमाए को हम आजमाते रहे..(वीरेंद्र)/1-669

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment