Friday, 17 July 2015

1-666 किसी के लिए बेचैनी

किसी के लिए बेचैनी इश्क की अलामत हो, ज़रूरी नहीं,
इश्क बिना भी कभी कभी दिल को दिल से राह होती है..(वीरेंद्र)/1-666

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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