Friday, 17 July 2015

1-665 ज़िन्दगी मिली है इंसा को

ज़िन्दगी मिली है इंसा को तकलीफे उठाने के लिए,
कोई ख़ुशी आती भी है इसमें तो लौट जाने के लिए..(वीरेंद्र)/1-665

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment