Thursday, 16 July 2015

0-500 झुलसाती गर्मी में अगर

झुलसाती गर्मी में अगर थोड़ी बरसात हो,
दर्द भरी इस तन्हाई में अगर तेरा साथ हो,
जुबां से काम लेने की फिर क्या दरकार,
जब आँखों ही आँखों में दिल की बात हो..(वीरेंद्र)/0-500

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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