Thursday, 16 July 2015

0-499 वक्त निकलता है तो

वक्त निकलता है तो निकल जाए,
ये दिलकश मंज़र हम निकलने नहीं देंगे,
नहीं छोड़ेंगे दामन इन हसीन पलों का,
इन रिश्तों की गर्माहट कम होने नहीं देंगे..(वीरेंद्र)/0-499

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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