Tuesday, 9 June 2015

2-297 "विश्शु भैया"

 विश्शू भैय्या.......

हमारी माँ के सबसे सुंदर बेटे थे तुम, "विश्शू भैय्या",
भले ही हो गए आज तुम हमारी आँखों से ओझल,
पर दिलों में बने रहोगे तुम वैसे ही, हर क्षण, हर पल,
तुम थे अदभुत जीवत के, अन्य सभी से हटके,
जीवन भर ही बांटते रहे तुम हमें खुशियाँ  और प्रीत,
कैसे  भूलें  कृष्णाजी, विवेक, विकास और  विनीत,
जो हसीन ख्वाब देखे थे तुमने अपनी "टायब्रोस" में,
तुम छोड़ कर क्यों चल दिए ऐसे ही बस बीच में,
अभी तो बहुत कुछ तरक्की बाकी थी तुम्हे देखने को,
"वेलनेस" का तुम्हारा सपना था बस पूरा होने को,

तुम जहां हो, वहीँ से देखोगे, वो सब होता हुआ,
जो तुमने सोचा था, चाहा था, परिवार के लिए,
पूर्ण होंगे वो हर काम ,तुमने रखी नींव जिनकी,
पूर्ण करेंगे तुम्हारी पत्नी,पुत्र,बाहें और पोता-पोती.......................................(वीरेंद्र)

                                तुम्हारा छोटा भाई: वीरेंद्र  ("लाला")  १७.२.२०१२.

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