Monday, 8 June 2015

1-041 खुशियों की बड़ी चाह थी

खुशियों की बड़ी चाह थी जिनसे, बहुत रुलाया उन्हीं ने,
जिनको  अपना बनाया था,  हमें अजनबी बनाया उन्हीं ने....(वीरेंद्र)/1-041

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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