Monday, 8 June 2015

0-165 यकीन कर, मुझे इसका

यकीन कर, मुझे इसका गम नहीं,
जो मेरे शेर ग़ज़ल तुझे पसंद नहीं,
गैरों को मुबारक हो तेरी वाहवाह,
यकीन कर, मुझे इसका रंज नहीं ..(वीरेंद्र)/0-165

रचना: वीरेंद्र सिन्हा("अजनबी") 

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