Monday, 1 June 2015

3-82 ढूँढ कर तो देखो

ढूँढ कर तो देखो, खुदा कहाँ नहीं मिलता,

मिलता नहीं अगर कहीं, तो इंसा नहीं मिलता,


ज़ुबानों पर  रक्खे हैं चाहतों के अल्फाज़,

दिलों में मगर मुहब्बतों का निशां नहीं मिलता,


खुदा ने ही दे रक्खा है हुक्म जीने का,

जिंदगी न होती तो कोई शख्स परेशां नहीं मिलता,


कौन खाता खौफ खुदा के कहर से,

इंसान को अगर मौत का फरमाँ नहीं मिलता,


खुदा के सामने कर लो अपने गुनाह कबूल,

के इस जहाँ में उससे बड़ा कोई राजदां नहीं मिलता....(वीरेंद्र)


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"/3-82

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