Friday, 8 May 2015

2-282 सामजिक संवेदनाएं अभी

सामाजिक संवेदनाएं अभी तक मरी नहीं, जिंदा हैं,
ये और बात है कुछ दरिन्दे भी अभी मरे नहीं, ज़िंदा हैं...(वीरेंद्र)/2-282

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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