Friday, 29 May 2015

1-653 खुद जो सारे जहाँ

खुद जो सारे जहाँ के लिए एक सिरदर्द है,
सिर ना होते हुए भी उसके सिर में दर्द है..(वीरेंद्र)/1-653

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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