Tuesday, 12 May 2015

1-647 काश रिश्ते भी पैरहन की

काश रिश्ते भी पैरहन की तराह हुआ करते,
लोग पहन लिया करते, उतार भी दिया करते..(वीरेंद्र)/1-647

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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