Thursday, 7 May 2015

1-645 खौफ खाता हूँ जब मै

खौफ खाता हूँ जब मै किसी शय से, उससे दूर हो जाता हूँ,
मगर खौफ खाता हूँ जब खुदा से, उसके करीब हो जाता हूँ..(वीरेंद्र)/1-645

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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