Thursday, 7 May 2015

1-642 इतना भी गरीब कभी

इतना भी गरीब कभी न बना देना मुझे मेरे खुदा,
के तेरी बख्शी बेशुमार दौलत से किसी का भला न कर सकूं..(वीरेंद्र)/1-642

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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