Thursday, 7 May 2015

1-640 न तो मिटटी खराब थी

ना तो मिटटी खराब थी ना जड़ खराब थी,
प्यार का पौधा न बढ़ा, किस्मत खराब थी..(वीरेंद्र)/1-640

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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