Friday, 29 May 2015

0-497कच्ची कलि से फूल

कच्ची कलि से फूल खिले क्यों थे,
बे-दर्द बे-वफा से हम मिले क्यों थे,
मंजिल अगर जुदा थी उसकी तो,
हमसफ़र बनके साथ चले क्यों थे..(वीरेंद्र)/0-497

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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