Friday, 29 May 2015

0-496 खौलते पानी के बुलबुले

खौलते पानी के बुलबुले शांत हो गए,
चुप बेचारे योगेन्द्र और प्रशांत हो गए,
नेताजी ने दबा दी लोकतंत्र की आवाज़,
मीडिया के मेले भी अब एकांत हो गए..(वीरेंद्र)/0-496

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment