Thursday, 7 May 2015

0-491 हिला दिया मेरे दिल की

हिला दिया मेरे दिल की जागीर को,
ढहा दिया मेरे ख़्वाबों की ताबीर को,
तुम भी किसी ज़लज़ले से कम नहीं,
गिरा दिया जज्बातों की तामीर को..(वीरेंद्र)/0-491

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment