Wednesday, 25 March 2015

2-293 आओ "स्टिंग, स्टिंग" खेलें,

आओ "स्टिंग, स्टिंग" खेलें,
एक दुसरे के राज़ हम खोलें.
भोली भाली मासूम जनता,
आओ अब हम आँखें खोलें...(वीरेंद्र)/2-293

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

2-279 आज भी निकल जाता

आज भी निकल जाता मौका मेरे हाथ से,
अगर आज ये गुलाल न होता मेरे हाथ में..(वीरेंद्र)/2-279

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

2-278 जहाँ आकर धैर्य की

जहाँ आकर धैर्य की सीमा ख़त्म हो जाती है,
वहां से एक क्रान्ति की शुरुवात हो जाती है...(वीरेंद्र)/2-278

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

1-627 कहते थे जो सारी दुनिया

कहते थे जो सारी दुनियां को भुला देंगे हमारे लिए,
हमें भी आज सारी दुनियां में शामिल कर लिया उन्होंने..(वीरेंद्र)/1-627

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

1-626 इतना सन्नाटा किस

इतना सन्नाटा किस काम का,
सहर हो गई पर नज़ारा शाम का..(वीरेंद्र)/1-626

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

1-625 इश्क करने वाले जंजीरों

इश्क करने वाले जंजीरों से कहाँ रुका करते हैं,
वो बेवफा हैं जो जंजीरों पे इल्जाम रखा करते हैं..(वीरेंद्र)/1-625

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

1-624यूं ही नहीं मिलती

यूं ही नहीं मिलती मंजिल, जुस्तजू में उसकी निकलना पड़ता है,
हमसफ़र होने से बात नहीं बनती हमख्याल भी बनना पड़ता है..(वीरेंद्र)/1-624

रचना : वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

0-488 मै तिश्नगी में प्यासा

मै तिशनगी में प्यासा तड़पता रहा,
समुन्दर मेरी बेबसी पर हँसता रहा,
ज़िन्दगी में आते रहे अँधेरे -उजाले,
मेरा चाँद निकल के भी छुपता रहा..(वीरेंद्र)/0-488

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

बद-दुआएं एक न एक दिन

बद-दुआएं एक न एक दिन ज़रूर सताती हैं,
मुंह से निकलें न निकलें, मगर लग जाती हैं,
भूल कर भी न लो बद-दुआएं किसी की तुम,
एक बार लेकर ये कभी न वापस दी जाती हैं..(वीरेंद्र)/0-487

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

Tuesday, 3 March 2015

0-485 जीना एक कला है


जीना एक कला है और मुहब्बत भी एक कला है,

हर चीज़ को चमकाने में राजनीति का रंग घुला है,

बेवफाइयों, वादा-खिलाफियों पर अब क्या गिला,

मुकर जाने का नया चलन जो अब चल निकला है ..(वीरेंद्र)/0-485


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

0-486 मुहब्बत ही आबाद


मुहब्बत ही आबाद करती है,

मुहब्बत ही बर्बाद करती है,

किसका ज़ोर चला  इस पर,

जो चाहे ये अपने आप करती है ..(वीरेंद्र)/0-486


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"