Sunday, 20 October 2013

0-239-"लो हम तो अब चुप होकर

लो हम तो अब चुप होकर बैठ गए,
अधूरी बुझी प्यास ले कर बैठ गए,
तुमने तो कहा था लौटकर आओगे,
तुम आये, पर मुंह सुजाकर बैठ गए. ...(वीरेंद्र)/0-239

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

0-238-"दिल में कब से दबा रखा है

दिल में कब से दबा रखा है प्यार का ज्वार,
डरता हूँ खुदसे, कुछ नहीं कर पाता इज़हार,
आकर तुम मेरा इम्तिहाँ लेके चले जाते हो,
तुमने भी मुझसे कभी हाल न पूछा एकबार. ..(वीरेंद्र)/0-238

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

0-337-"रात मैंने अपने दिल को

रात अपने दिल को थप्पड़ मारके सुलाया,
जाने क्यों, 'उसे' ही याद करता है अब भी,
बारबार जिसने की इतनी बेवफाई मुझ से,
उसी बेवफा की वकालत करता है अब भी. ...(वीरेंद्र)/0-337

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

0-174-"महफ़िल में आज मेरी आँख

महफ़िल में आज मेरी आँख से आंसू निकल आये,
जब मुझे छोड़ कर , उसको सबके शेर पसंद आये,
मेरी ग़मगीन ग़ज़ल का न हुआ उसपे ख़ास असर,
रकीब के दर्दे-बयाँ पे मगर उसने खूब आंसू बहाए. ..(वीरेंद्र)/0-174

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")


0-139-"उनको इंसान कहलाने का

उनको इंसान कहलाने का हक़ नहीं है,
दिलों में जिनके कोई मुहब्बत नहीं है,
बे-शऊर रूखी सी हैं जिंदगियां उनकी,
जो नहीं किसीके जिनका कोई नहीं है. ..(वीरेंद्र)/0-139

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

1-243-"मै भी अब पत्थर हो जाना

मै भी अब पत्थर हो जाना चाहता हूँ,
वो अकेला ही भला क्यों पत्थर बना रहे..(वीरेंद्र)/1-243

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

2-268-"परस्पर सामंजस्य क्यों

परस्पर सामंजस्य क्यों नहीं है,
वही तो है प्रेमाधार,
मानता तू है,
मै भी. . . . . . . .(वीरेंद्र)/2-268

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

1-416-"अच्छा किया तूने इस दिल

अच्छा किया तूने मेरे दिल की जुबां पर ताला जड़ दिया,
मै भी परेशां था इसकी आदत से तेरे नाम की रट लगाने की...(वीरेंद्र)/1-416

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

1-022-"जबसे लिखी हमने ग़ज़ल

जबसे लिखी हमने ग़ज़ल उनकी तारीफ में,
निगाहों में उनकी हम, सच्चे शायर हो गए...(वीरेंद्र)/1-022

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

1-423-"इससे पहले कि लोग मुझे

इससे पहले कि लोग मुझे जलाएं जोर शोर से,
क्यों न मै अपने अन्दर का रावण दहन कर दूं...(वीरेंद्र)/1-423

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

2-266-"खुश हैं बहुत बादल और

खुश हैं बहुत बादल और आसमान,
तिमिर दूर कर रहा, उनका ये चाँद,
क्या मै भी रखूँ आस, उजालों की ?
क्या लौट कर आएगा मेरा भी चाँद?...(वीरेंद्र)/2-266

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

1-021-"लिखे जो शेर और ग़ज़ल

लिखे जो शेर और ग़ज़ल मैंने बस उसके लिए,
दुनिया ने तो पढ़े बार बार, बस उसी ने ना पढ़े. .(वीरेंद्र)/1-021

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

1-234-"तेरे दिए ज़ख्मों ने मेरा

तेरे दिए ज़ख्मों ने मेरा बड़ा साथ दिया,
ता-उम्र मेरे साथ रहे, तन्हा होने न दिया..(वीरेंद्र)/1-234

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

1-214-"दिल को मेरे समझा उसने

दिल को मेरे समझा उसने कागज़ का टुकड़ा,
लिखा,काटा,मिटाया,तोड़ मरोड़कर फ़ेंक दिया..(वीरेंद्र)/1-214

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

1-415-"मेरे दिल में उठे तूफ़ान

मेरे दिल में उठे तूफ़ान को हल्के में ले लिया उसने,
जबसे सुनी गलत पेशनगोई तूफ़ान की,-महकमे से..(वीरेंद्र)/1-415

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

Wednesday, 9 October 2013

1-348-"मेरे शेरों की दास्ताने-गम

मेरे शेरों की दास्ताने-गम पर, वाह-वाह वो करता गया,
ज़ालिम ने ये भी न सोचा, कुछ हकीकत भी है मेरे शेरों में...(वीरेंद्र)/1-348

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

Sunday, 6 October 2013

0-320-"दोस्ती निभाने का मतलब

दोस्ती निभाने का मतलब ये नहीं,
कोई हम पर यूं ही फनाह हो जाय,
तोड़ डालने का भी मतलब ये नहीं,
उसकी सूरत से भी बेज़ार हो जाय...(वीरेंद्र)/0-320

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

0-101-"जिंदगियों में एक तूफ़ान सा

जिंदगियों में एक तूफ़ान सा आता है,
झोंके में अपनापन काफूर हो जाता है,
वफादारियां भी यहाँ बदलती रहती हैं,
यहाँ  एक जाता है, तो दूसरा आता है. ..(वीरेंद्र)/0-101 

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

1-407-"अकेले तुझसे ही भला

अकेले तुझसे ही भला मै क्यों शिकायत करूँ,
तू पहला शख्स तो नहीं जो मुझसे बेवफा हुआ है..(वीरेंद्र)/1-407

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

2-265-"विदा होने की तू बात

विदा होने की तू बात मत कर, भले ही छुप जा यहीं कहीं,
चाँद भी तो रौशनी देके छुप जाता है, होता विदा कभी नही..(वीरेंद्र)/2-265

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

Friday, 4 October 2013

0-299-"मै ज़माने से लड़ता रहा

मै ज़माने से लड़ता रहा, और लड़ता रहूँगा,
वफ़ा करूंगा, वफ़ा का तलबगार ना रहूँगा,
तेरी यादों से ही रखूंगा रौशन मै ज़िन्दगी,
भूल भी जाओगे तो प्यार एकतरफा करूंगा. ..(वीरेंद्र)/0-299

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

0-237-"रूठी है दुनियां मुझसे

रूठी है दुनिया मुझसे, कभी तू भी रूठ जा,
कभी तो मुझे लेने दे तुझे मनाने का मज़ा,
आज बड़ा दिल कर रहाहै, नखरे उठाने का,
ढूंढ कोई अच्छा बहाना, बस आज रूठ जा. ..(वीरेंद्र)/0-237

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

1-406-"दिल में उतरके देखा उसके

दिल में उतरके देखा उसके तो ग़मों का ढेर मिला,
वो कहता था दर्द उसके पास से कभी गुज़रा भी नहीं..(वीरेंद्र)/1-406

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

2-264-"सोच रहेगी वही जब तक


सोच रहेगी वही, जब तक न होगा ह्रदय में परिवर्तन,

शब्द रहेंगे प्रभावहीन, यदि भावों का न होगा मिश्रण...(वीरेंद्र)/2-264

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

1-404-"खुशफहमी ही पाले रहते

खुशफहमी ही पाले रहते तो अच्छा था,
हमें भी क्या सूझी, उन्हें आजमाने की. ..(वीरेंद्र)/1-404

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

1-229-"आजिज़ आ गए थे

आजिज़ आ गए थे इश्क का बोझ उठाते-उठाते,
मशकूर हैं हम आपके जो इश्क से नफरत करा दी..(वीरेंद्र)/1-229

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

1-228-"तुम्हारे पास आकर ज़माने

तुम्हारे पास आकर, ज़माने से हम दूर हो गए,
अब किसके पास जाएँ, जब सभी से दूर हो गए ..(वीरेंद्र)/1-228

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

2-263-"जन-समूह को यदि


जन-समूह को यदि स्नेह-पूर्वक न मिलेगा सुरक्षा का अधिकार,

उसे लड़ना ही होगा भले स्वीकार करना पड़े सरकारी अत्याचार..(वीरेंद्र)/2-263

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

1-198-"कटने को तो कट जायगी

कटने को तो कट जायगी ये ज़िन्दगी,
ये तन्हाई तो नहीं, जो कट ही न सके. ..(वीरेंद्र)/1-198

 रचना: वीरेंद्र सिन्हा ("अजनबी")

Wednesday, 2 October 2013