Monday, 27 March 2017

0-593 तुझे अगर मुझसे मुहब्बत

तुझे अगर मुझसे मुहब्बत नहीं,
तो बता जुदा होकर रोया क्यों था,
सींचना नहीं था इस पौधे को,
तो भला तुमने उसे बोया क्यों था..(वीरेंद्र)/0-593


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

Tuesday, 21 March 2017

1-898 मेरे बुरे वक्त

मेरे बुरे वक्त मेरा बुरा न मान, तुझे बुरा कहने पर,
याद रख, मै ही याद करूंगा तुझे, तेरे ना रहने पर..(वीरेंद्र)/1-898

वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

1-897 ये आवाज़ यकीनन

ये आवाज़ यकीनन उसके दिल की नहीं,
पत्थर भी कहीं इस तरह धड़का करते हैं..(वीरेंद्र)/1-897


वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

0-592 आपको ज़रा बेवफा

आपको ज़रा बेवफा क्या कह दिया,
आपने तो हाथ में हमें आईना दे दिया।
देखता हूँ बस तुम्हारी ही सूरत इसमें,
तुमने कौनसा मुझे ये आइना दे दिया।..(वीरेंद्र)/0-592


वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

1-896 शानों पर बिखरी

शानों पर बिखरी आपकी ये ज़ुल्फ़ें गुलबर्ग लगती हैं,
नाज़ां हूँ दीद पर, आप सर से पांव गुलमर्ग लगती हैं..(वीरेंद्र)/1-896


वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

2-506 पिछड़ेपन के खिलाफ

पिछड़ेपन के खिलाफ आए दिन हम पुरज़ोर आवाज़ें उठाते हैं,
और हम ही हैं जो रोज़-रोज़ विकास की राह में रोड़े अटकाते हैं।
कारवां-ऐ-तरक्की थमता नहीं किसी भी सूरत में, ये समझ लो,
हम लोग जब थक जाते हैं, तो दूसरे लोग कदम आगे बढ़ाते हैं।..(वीरेंद्र)/2-506

वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

Thursday, 16 March 2017

1-895 न्यामते-खुदा की शक्ल में


न्यामते-खुदा की शक्ल में मेरे पास मेरे दर्द तो हैं,
गर मेरे दामन  में नहीं खुशियाँ, मेरे इर्द-गिर्द तो हैं,.(वीरेंद्र)/1-895

वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"