Friday, 28 April 2017

2-518 बड़ी बात छोटे मुंह से

बड़ी बात छोटे मुंह से अच्छी नहीं लगती,
जब किसी से एक चींटी भी नहीं मरती.(वीरेंद्र)/2-518


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

2-510 दुश्मन के सर उडाए

दुश्मन के सर उड़ाए नहीं, तो झुकाए तो जा सकते हैं,
पड़ोसी अगरचे बदले नहीं, तो सुधारे तो जा सकते हैं.

शहीदों पर दुश्मन के हमलों की मज़म्मत है नाकाफी,
नाकारा हों अगर हुक्मरां, तो हटाये तो जा सकते हैं..(वीरेंद्र)/2-510


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

1-921 ऐसे वक्त अपने रास्ते

ऐसे वक्त अपने रास्ते बदल लिए तुमने,
तुम्हे लेके जब कई ख्वाब थे बुन लिए मैंने..(वीरेंद्र)/1-921


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

Monday, 24 April 2017

0-597 चुराए जा सकते हैं हीरे

चुराए जा सकते हैं हीरे जवाहरात मेरी शायरी के,
इल्म, हुनर, ख्यालात मेरे चुराए नहीं जा सकते,
चुराके पढ़े तो जा सकते हैं महफिलों में मेरे शेर,
दिलो-जिगर में हाज़रीन के उतारे नहीं जा सकते.(वीरेंद्र)/0-597

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

Saturday, 22 April 2017

2-517 हम औरतें अपने हकूक

हम औरतें अपने हक़ूक़ के खूं का तस्करा भी न करें,
अक्लियतें उनका क़त्ल कर दें और हम चर्चा भी न करें..(वीरेंद्र)/2-517

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

1-920 तुम्हारे बगैर बस यह

तुम्हारे बगैर बस यह ज़िन्दगी सरक रही है,
बुझने से पहले लौ चराग की भड़क रही है..(वीरेंद्र)/1-920

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

1-919 आतिशे-नफरत में न जल

आतिशे-नफरत में न जल इतना भी,
कि मुहब्बतें भी तुझको बचा न सकें..(वीरेंद्र)/1-919

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"